इस Inspirational Video में आप जानेगे क्रोध करने के नुकसान क्या होते है | मनुष्य को क्रोध क्यों आता है | क्रोध के दुष्परिणाम क्या हो सकते है | क्रोध को कैसे पराजित करें | क्रोध पर नियंत्रण कैसे करे | इंसान को क्रोध क्यों आता है |
#Anger
#AngerManagement
#क्रोधकरनेकेनुकसान
#Inspirationalvideo
#KnowledgeLifetime
Summary:
क्रोध जीवन का एक नकारात्मक भाव है |
जब भी कोई कार्य पूरा नहीं होता है और हमारे अनुशार नहीं होता है, जबरदस्ती कोई कार्य करना पड़ता है तो क्रोध आ जाता है |
जिस तरह दूध जब उबलने लगता है तो उफनता है , यही स्थति क्रोध के समय वयक्ति की होती है |
क्रोध की अवस्था में वयक्ति यदि इस ऊर्जा को निकाल देता है तो जल्दी शांत भी हो जाता है |
जब क्रोध को दबा दिया जाता है तो यह कभी भी ज्वालामुखी की तरह फट सकता है |
कार्ल गुस्ताव जंग का कहना है की, यदि हम क्रोध या गुस्से को दबाने का प्रयास करते है, तो वह हमारे अवचेतन में जाकर हमारे भीतर ही उमड़ता रहता है, जब तक उसे निकास का द्वार नहीं मिलता है| यदि उसे सही रूप में बहार निकलने का द्वार नहीं मिलता है, तो वह विस्फोट की तरह कभी भी फट सकता है | इसलिए जरूरी है कि क्रोध की इस ऊर्जा का सकारात्मक रूप से प्रयोग किया जाए |
मन में दबे हुए क्रोध को बहार निकलने से ही चित शांत होता है |
यदि वयक्ति क्रोध करता है तो लोग उससे दूरी बनाने लगते है |
यदि क्रोध का आवेग ज्यादा हो तो एकान्त में चले जाना चाहिए |
Watch More:
अच्छी किताब हमे जीवन जीने का ढंग सिखाती है: https://youtu.be/oogin-3HiVI
Prashansa Karna Kyu Avashyak Hai: https://youtu.be/JtjwdMN588E
वैवाहिक जीवन खुशहाल कैसे हो : https://youtu.be/Bsc9tlcem8c
सफलता के लिए मजबूत टीम की आवश्यकता क्यों है?: https://youtu.be/1lABiSJ7vU4
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क्रोध जीवन का एक नकारात्मक भाव है |
जब भी कोई कार्य पूरा नहीं होता है और हमारे अनुशार नहीं होता है, जबरदस्ती कोई कार्य करना पड़ता है तो क्रोध आ जाता है |
जिस तरह दूध जब उबलने लगता है तो उफनता है , यही स्थति क्रोध के समय वयक्ति की होती है |
क्रोध की अवस्था में वयक्ति यदि इस ऊर्जा को निकाल देता है तो जल्दी शांत भी हो जाता है |
जब क्रोध को दबा दिया जाता है तो यह कभी भी ज्वालामुखी की तरह फट सकता है |
कार्ल गुस्ताव जंग का कहना है की, यदि हम क्रोध या गुस्से को दबाने का प्रयास करते है, तो वह हमारे अवचेतन में जाकर हमारे भीतर ही उमड़ता रहता है, जब तक उसे निकास का द्वार नहीं मिलता है| यदि उसे सही रूप में बहार निकलने का द्वार नहीं मिलता है, तो वह विस्फोट की तरह कभी भी फट सकता है | इसलिए जरूरी है कि क्रोध की इस ऊर्जा का सकारात्मक रूप से प्रयोग किया जाए |
मन में दबे हुए क्रोध को बहार निकलने से ही चित शांत होता है |
यदि वयक्ति क्रोध करता है तो लोग उससे दूरी बनाने लगते है |
यदि क्रोध का आवेग ज्यादा हो तो एकान्त में चले जाना चाहिए |
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