व्यर्थ की शंकाएं त्यागिये | तुम शिकायतें करना बंद कर दो, तुम अपने में कमियां देखना छोड़ दो, तुम निराशावादिता छोड़ दो। जो इन बातों में लगा रहता है, वह काम से भागने वाला इंसान है | कुछ न करने वाला इंसान है | एक शेखचिल्ली मात्र है। Motivational Video by Knowledge Lifetime.
Summary:
तुम शिकायतें करना बंद कर दो,
तुम अपने में कमियां देखना छोड़ दो,
तुम निराशावादिता छोड़ दो।
जो इन बातों में लगा रहता है,
वह काम से भागने वाला इंसान है |
कुछ न करने वाला इंसान है |
एक शेखचिल्ली मात्र है।
अपने उद्देश्य इतने ऊंचे मत बना लीजिए कि उस तक आप पहुंचने के योग्य ही न हों। अपनी महत्वाकांक्षाओं और योग्यताओं में पर्याप्त संतुलन रखिये। दूसरे आपका मजाक बनाएंगे, यह मिथ्या-भय त्याग दीजिये।
अपने उद्देश्य की ओर निरन्तर अविश्राम गति से चलते रहना ही जीतने के लक्षण हैं।
स्मरण रखिये, हानि-लाभ का क्रम सर्वत्र चलता है, किन्तु यदि आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लेते है, तो हानि नगण्य है।
आपकी सफलता में सबसे बड़ी सहायक ये वस्तुएं हैं
1. शरीर का स्वास्थ्य
2. मन का स्वास्थ्य,
3. उत्साहपूर्ण आशावादी दृष्टिकोण
4. मित्र तथा हितैषी
5. पुस्तकें, जिनके अनुभव के बल पर आपको निरन्तर चलना होगा
6. आन्तरिक शान्ति
7. दूसरों की सेवा और सहयोग
अपने साथ इन्हें लेकर चलने वाला सदैव लाभ में रहता है।
अपने उद्देश्यों की पूर्ति के हेतु खरा और ठोस कार्य करने में आनाकानी कदापि न कीजिए।
तुम्हे अपने व्यक्तित्व की विशेषताओं को प्रकट करना चाहिए |
तुम्हे अपने विचारों को समाज के सम्मुख उपस्थित करना चाहिए |
तुम्हे अपने दृष्टिकोण को दृढ़ता से सब के सम्मुख स्पष्ट रूप से पेश करना होगा |
पुस्तकें लिखकर, समाचार पत्रों, मासिक पत्रों, साप्ताहिकों में अपने विचार लेखबद्ध कर जनता के समक्ष पेश करना, भाषण देना, क्लबों में खुले दिल से बात चीत करना, मित्र मण्डली में बोलने से न हिचकिचाना, जब कभी कोई भाषण देने को कहे पीछे न रहना, दूसरों को आकर्षित करने के उपाय है।
इनके द्वारा आप जनता का विश्वास प्राप्त कर लेते हैं। एक बार जनता का विश्वास प्राप्त हो जाने पर आप सार्वजनिक जीवन में अद्भुत सफलता प्राप्त कर सकते हैं। स्मरण रखिये, कि मानसिक जगत् में सभी भिन्न भिन्न शक्तियों को परस्पर मिल कर आगे बढ़ना है। सन्तुलन, सहयोग, सभी शक्तियों का सामूहिक प्रयत्न, शरीर और मन का समन्वय ही विजय का रहस्य है।
Chinta Ko Kaise Door Kare
अमेरिका के एक प्रमुख डॉक्टर ‘मेडिकल टाक’ नामक पत्र में लिखते है कि ‘वर्षों के अनुभव के बाद मैं इस निर्णय पर पहुँचा हूँ कि दुःख और चिन्ता दूर करने के लिए ‘भूल जाओ’ से बढ़कर कोई दवा नहीं है, अपने लेख में वे लिखते हैं—
“यदि तुम शरीर से, मन, से और आचरण से स्वस्थ होना चाहते हो अस्वस्थता की सारी बातें भूल जाओ।”
नित्य प्रति के जीवन में छोटी-मोटी चिन्ताओं को लेकर झींकते मत रहो। उन्हें भूल जाओ। उन्हें पोसो मत। अपने अव्यक्त या अन्तस्थल में पालकर मत रखो। उन्हें अन्दर से निकाल फेंको और भूल जाओ। उन्हें स्मृति से मिटा दो।
दुःख की, चिन्ता की, बीमारी की बातें न करो, न सुनो। स्वास्थ्य की, आनन्द और प्रेम की, शान्ति और सौहार्द्र की बातें करो और उन्हीं को सुनो। देखोगे कि तुम स्वास्थ्य लाभ करोगे, आनन्द लाभ करोगे, प्रेम पाओगे, शान्ति पाओगे।
इंग्लैण्ड के प्रधानमन्त्री विन्स्टन चर्चिल दिन-रात के चौबीस घण्टों में 18 घण्टे परिश्रम करने के आदी रहें हैं। उनसे जब पूछा गया कि क्या चिन्ता ने कभी उन पर आक्रमण किया है, तो उन्होंने उत्तर दिया-”मेरे पास इतना काम है कि चिन्ता करने के लिए समय ही नहीं मिल पाता।” चिन्ता फालतू आलसी निष्क्रिय मन का एक विकार है। कमजोर तबियत के व्यक्ति जब खाली होते हैं, तो बजाय उन्नत पहलू देने के, वे अपने विरोध, भय, दुःख, क्लेश की बातें सोचा करते हैं। जिनके पास पर्याप्त कार्य हैं उन्हें चिन्ता जैसे विलास के लिए कहाँ अवकाश है।
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