Time Stamp:
00:00:09 मर्यादा का अर्थ क्या होता हैं?
00:01:15 भगवान राम ने अवतार किस लिए लिया था?
00:02:11 मर्यादा का पालन न करने से क्या होता है ?
00:03:31 अपनी आमदनी से अधिक खर्च करने से क्या परिणाम होता है?
00:05:27 मनुष्य ज्ञानवान् प्राणी है
00:06:20 परिवार में मर्यादा पालन न करने से क्या परिणाम होता है?
Summary:
मर्यादा के अर्थ हैं-न्याय मार्ग में स्थित, सीमा, नीति का बंधन, निश्चित प्रथा या व्यवस्थित नियम आदि। न्याय मार्ग में स्थिति धर्म-मर्यादा
मर्यादा शब्द से ही मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीरामचन्द्रजी का स्मरण हो आता है। मर्यादा शब्द तो केवल साढ़े तीन अक्षर का है, किन्तु मर्यादा पालना उतना सरल नहीं। सती सीता को भी मर्यादा पालना अर्थात् मर्यादा की रेखा को उल्लंघन करते ही रावण उन्हें उठा ले गया और फलतः उन्हें (सीता) को अशोकवाटिका में बन्दी रहना पड़ा। इससे स्पष्ट है कि मर्यादा-पालन कितना कठिन है और न पालने से कितने कष्ट उठाने पड़ते हैं।
प्राकृतिक नियमानुसार हर चीज की मर्यादा होती है और जहाँ मर्यादा की अवहेलना हुई कि मनुष्य संकटों का शिकार हुआ। इसीलिए विद्वानों ने कहा है कि “अति सर्वत्र वर्जयेत्।” अर्थात् किसी भी कार्य में अति नहीं होना
यदि कोई व्यक्ति अपनी आमदनी से अधिक खर्च करता है तो उसे अधिक संकट भोगना पड़ता है और इसीलिए यह कहावत है कि “कमावे धेला खेर्चे उसकी दुर्गति देखे कौन?” तात्पर्य यह कि हर व्यक्ति को अपनी आमदनी की मर्यादानुसार ही खर्च करना चाहिए अन्यथा मनुष्य मुश्किल में आ गिरता है।
मानव शास्त्र में मनुष्य जीवन के जो चार विभाग किए हैं, उनमें प्रथम विभाग ब्रह्मचर्य का है, यह बड़ा ही महत्त्वपूर्ण है, इसे मनुष्य जीवन का आधार स्तम्भ कहे तो कोई अतिश्योक्ति न होगी।
मनुष्य ज्ञानवान् प्राणी है, ईश्वर ने उस पर कृपा कर उसे ज्ञान दिया है और इसी कारण वह सर्वश्रेष्ठ प्राणी गिना जाता है, अन्यथा “ज्ञानेन” हीना पशुभि: समाना।'' वाली कहावत के अनुसार उसमें और पशु में कोई व्यक्ति ज्ञानहीन (( मूर्खतापूर्ण) कार्य कर बैठता है तो, उसे अन्य व्यक्ति तुम जानवर हो क्या
मनुष्य जितना अधिक मयाँदाओं का उल्लंघन करता है उतना ही अधिक उसका पतन होता जाता है | मनुष्य जीवन के वास्तविक उद्देश्य के लक्ष्य की प्राप्ति मर्यादाओं के पालन पर ही निर्भर करती हे ।
यह तो सम्भवत: सभी जानते ही होंगे कि हाल ही में अमेरिका के एक विमान यू- २ ने अपनी मर्यादा का उल्लंघन किया तो उसे रूसी उल्का (राकेट) द्वारा नष्ट कर दिया गया और परिणाम स्वरूप शीर्ष सम्मेलन, जिसकी ओर संसार के शान्ति प्रिय सभी देश बड़ी आतुरता से अपनी दृष्टि जमाये बैठे थे, विफल हो जाने के कारण उनकी आशा एवं अभिलाषा पर भी पानी फिर गया! संसार में जो शान्ति स्थापित होने की आशा थी वह चकनाचूर हो गयी और इतना ही नहीं विश्व व्यापी युद्ध की भी आशंका होने लगी। मर्यादा उल्लंघन के ऐसे ही दुष्परिणाम होते हैं।
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